:
Breaking News

Bihar Panchayat Election News: नए परिसीमन से बिहार में 4,500 नई पंचायतों का रास्ता साफ, पंचायत व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar: बिहार सरकार पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। नए परिसीमन के बाद पंचायतों, वार्डों और जनप्रतिनिधियों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पंचायत चुनाव, सरकारी खर्च और ग्रामीण विकास की तस्वीर बदलने की संभावना है।

पटना, 18 जुलाई। आलम की खबर: बिहार की पंचायती व्यवस्था में करीब तीन दशक बाद व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद राज्य में पंचायतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसके साथ ही मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों की संख्या भी बढ़ सकती है। इस प्रक्रिया का असर आगामी पंचायत चुनाव, ग्रामीण प्रशासन और विकास योजनाओं पर भी देखने को मिलेगा।

सरकारी तैयारी के अनुसार इस बार परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इससे पहले पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था। पिछले तीन दशकों में आबादी बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए सरकार प्रतिनिधित्व का संतुलन स्थापित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से पंचायतों और वार्डों की नई सीमाएं तय की जाएंगी।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार राज्य में वर्तमान लगभग 8,041 ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर करीब 12,500 तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है तो मुखिया और सरपंच के पदों में भी लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसी तरह वार्ड सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों की संख्या में भी बड़ा इजाफा होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

नई पंचायतों के गठन का असर सरकारी खर्च पर भी पड़ेगा। वर्तमान में पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय पर होने वाला वार्षिक व्यय बढ़ सकता है। इसके अलावा नई पंचायतों के लिए पंचायत भवन, प्रशासनिक कार्यालय, सामुदायिक सुविधाएं और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की आवश्यकता होगी। इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने की संभावना है।

परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर भी असर पड़ सकता है। नए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण, आरक्षण रोस्टर और प्रशासनिक तैयारियों में समय लगने की स्थिति में चुनाव आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि प्रयास रहेगा कि चुनाव समय पर कराए जाएं। यदि किसी कारणवश चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो पाते हैं तो प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

पंचायती राज विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से पंचायतों की प्रशासनिक क्षमता और स्थानीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा। हाल ही में पंचायतों को स्थानीय स्तर पर कुछ कर और शुल्क वसूलने के अधिकार भी दिए गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में पंचायतों की आर्थिक और प्रशासनिक भूमिका पहले से अधिक मजबूत होने की संभावना है।

यह भी पढ़ें

कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल उद्घाटन के लिए तैयार

बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप योजना को मिली रफ्तार

बिहार उच्च शिक्षा विधेयक 2026 में बड़े बदलाव की तैयारी

बदलती पंचायत व्यवस्था, बढ़ती जिम्मेदारी

पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। आबादी के अनुरूप परिसीमन होने से स्थानीय प्रतिनिधित्व मजबूत हो सकता है, लेकिन इसके साथ प्रशासनिक तैयारी, वित्तीय संसाधन और समयबद्ध क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक होगा। नई पंचायतों का गठन तभी प्रभावी साबित होगा जब आधारभूत सुविधाओं, पारदर्शिता और विकास योजनाओं को समान गति से आगे बढ़ाया जाए।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *